अधाधुंध हो रही जिन्दा पेड़ों की कटाई…क्यों किसी को नहीं आ रहा नज़र..प्रशासन मौन,पर्यावरण प्रेमी चुप…सरपंच सचिव सभी लोग अनजान

देर रात हरे भरे पेड़ों की कटाई..सुबह हो रहा परिवहन

बिलासपुर— धीरे धीरे ही सही एक दिन बिलासपुर शहर के आस पास स्थित गांवों के हरे भरे पेड़ साफ हो जाएंगे। खासकर सरकारी जमीन पर स्थित बांस,आम, तेंदू जामुन,सरई जैसे पेड़ों का नामों निशान मिट जाएगा। सवाल है कि आखिर इसका जिम्मेदार कौन है। पर्यावरण प्रेमी चुप प्रशासन मौन है। घुूटकू निवासी समेत आधा दर्जन से अधिक लोगों ने तुर्काडीह समेत आस पास के क्षेत्रों में काटे जा रहे सरकारी पेड़ों की शिकायत आज जिला प्रशान के सामने पेश किया है। साथ ही जंगल माफियों से पेड़ों को बचाने को लेकर फरियाद की है। 

घुटकू लोखड़ी तुर्काडीह निवासी पवन मधुकर और कमल माथुर समेत स्थानीय युवाओं ने जिला प्रशासन से लिखित शिकायत कर हरे भरे पेड़ों को बचाने की गुहार लगायी है। युवाओं ने कहा कि तुर्काडीह समेत आस पास के गांवों में  काटे जा रहे पेड़ों  को लेकर चिंता जाहिर किया है। पवन और कमल ने बताया कि रोज रात को घुटकू से लेकर तुर्काडीड और आसपास के क्षेत्रों में सरकारी और अशासकीय जमीनों पर स्थित पेड़ों की अधाधुूंध कटाई हो रही है। मामले को लेकर कई बार नीचे से लेकर ऊपर तक पेड़ों को बचााने को लेकर गुहार लगाये..लेकिन हमारी आवाज नक्कार खाने में तूती साबित हो रही है। ना तो जिला प्रशासन ने पेड़ों की कटाई को गंभीरता से लिया और ना ही वन विभाग ने ही कोई सार्थक कदम उठाया है।

 

कमल ने बताया कि जिला प्रशासन को फोटो के साथ लिखित में एक बार फिर शिकायत पेश किया है। प्रशासन को बताया गया कि ठोस कार्रवाई नहीं होने से तुर्गाडीह के सैकड़ों एकड़ पर स्थित पेड़ गायब हो गये है। जंगल माफिया तुर्काडीह निवासी मुन्ना माथुर, रवि माथुर अमित माथुर सुमित और तारण लहरे, मनीराम रोज देर रात्रि को पेड़ों कटाई करते हैं। सुबह ट्रक से सभी लकड़ियों को आरा मिल के हवाले कर देते हैं। पिछले कुछ महीनों में देकते ही देखते तुर्काडीह स्थित 20 एकड़ से अधिक हरे भरे जमीन को माफियं ने नंगा कर दिया है।

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      यद्यपि कई बार इन्हें पेड़ काटने से रोकने का प्रयास किया गया। बावजूद इसके आदतन बदमाश अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं। जान से मारने की धमकी देते हैं। आलाधिकारियों से परिचय होंने का धौंस दिखाते हैं। कमल ने बताया कि रोज सुबह दर्जनों गाड़ियों से पेड़ों को लाश बनाकर परिवहन किया जा रहा है। आरा मालिकों से लाखों रूपयों की वसूली हो रही है।

पवन मथुकर ने बताया कि हम हर साल पौध रोपण अभियान चलाते हैं। लेकिन पिछले 15 सालों में एक भी पौधा पेड़ नहीं बना। अच्छा होता कि शासन सख्त कार्रवाई कर खड़े पेड़ों को बचाये। पेड़ पौधे बनकर तैयार हो या ना हों। कम से कम पहले से हरे भरे पेड़ों को बचाया जा सकता है। पवन के अनुसार देर रात्रि पेड़ों की अधाधुूंध कटाई के लिए आरा मालिक के अलावा सीधे तौर पर सरपंच ,.सचिव और ग्राम कोटवार जिम्मेदार है।

दुख की बात है कि हमारी शिकायतों को प्रशासन ने कभी भी गंभीरता से नहीं लिया। अभी भी समय है कि तुर्काडीह क्षेत्र में बचे हुए हरे भरे पेडों का काटने से रोका जाए। हरियाली के दुश्मनों के खिलाफ शासन सख्त कार्रवाई करे। ताकि हम आने वाली पीढियों को हरियाली का नमुूना तो पेश कर सकें। यदि जिला प्रशासन ने हमारी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया तो हम अनशन करने को मजबूर होंगे।

Bhaskar Mishra

पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 16 साल का अनुभव।विभिन्न माध्यमों से पत्रकारिता के क्षेत्र मे काम करने का अवसर मिला।यह प्रयोग अब भी जारी है।वर्तमान में CGWALL में संपादकीय कार्य कर रहा हूं।

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